Solar Panel: घर पर सोलर पैनल लगवाने से पहले जान लें पूरा खर्च, कितने साल में निकल सकती है लागत

Solar Panel: घर पर सोलर पैनल लगवाने से पहले जान लें पूरा खर्च, कितने साल में निकल सकती है लागत

बिजली का बिल हर महीने mhine बढ़ता देखकर कई घरों में सोलर पैनल solar panel लगाने का विचार आता है। छत पर पैनल लगते ही धूप से बिजली बनने लगती है और बिल घटने की उम्मीद जागती है। लेकिन सोलर पैनल solar panel लगवाना सिर्फ पैनल खरीदना नहीं है।सोलर सिस्टम की लागत घर की जरूरत पर निर्भर करती है। जितनी ज्यादा बिजली चाहिए, उतना बड़ा सिस्टम लगेगा और खर्च भी उतना ही बढ़ेगा। छत की दिशा, छाया और जगह भी लागत पर असर डालते हैं। किसी पड़ोसी के सिस्टम system की कीमत से अपने घर का अंदाजा लगाना गलत हो सकता है, क्योंकि हर घर की खपत और छत अलग होती है।

सोलर सिस्टम में क्या क्या खर्च आता है

सबसे बड़ा खर्च सोलर पैनल solar panel का होता है, लेकिन इसके अलावा इन्वर्टर Inver भी जरूरी है जो पैनल की बिजली को घर में इस्तेमाल लायक बनाता है। इसके साथ वायरिंग, संरचना यानी स्ट्रक्चर, नेट मीटर और लगाने की मजदूरी जुड़ती है। नेट मीटर वह व्यवस्था है जिससे बची हुई बिजली ग्रिड में जाती है और उसका हिसाब बिल में दिखता है।

रखरखाव का खर्च भी ध्यान में रखना चाहिए। पैनल panel पर धूल जमने से उत्पादन घट सकता है, इसलिए समय समय पर सफाई जरूरी है। इन्वर्टर की उम्र पैनल panel से कम हो सकती है और कई साल Year बाद उसे बदलना पड़ सकता है। ये छोटे खर्च लंबे समय में लागत का हिस्सा बनते हैं। इसलिए सिर्फ शुरुआती कीमत देखकर फैसला करना अधूरा होगा।

लागत कितने साल में निकल सकती है

लागत निकलने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि हर महीने mhine कितनी बिजली बनती है और बिल में कितनी बचत होती है। एक उदाहरण से समझें। अगर कोई सिस्टम लगाने में 2,50,000 रुपये लगे और हर महीने mhine बिजली बिल में 2,500 रुपये rupye की बचत हो, तो लागत निकलने में करीब 8 साल Year से ज्यादा लग सकते हैं। यह गणना केवल उदाहरण के लिए है, असली समय खपत, धूप, दर और रखरखाव के हिसाब से बदलता है।

बचत का हिसाब लगाते समय यह भी देखें कि दिन में कितनी बिजली घर में ही इस्तेमाल होती है। दिन में ज्यादा खपत वाले घरों home को फायदा जल्दी दिखता है, क्योंकि बनी हुई बिजली सीधे काम आती है। अगर दिन में घर बंद रहता है तो बचत का तरीका अलग होगा। इसलिए अपनी दिनचर्या के हिसाब से सिस्टम system का आकार तय करना समझदारी है।

लगवाने से पहले क्या जांचें

सबसे पहले पिछले 12 महीनों mhine के बिजली बिल निकालें और औसत मासिक खपत देखें। फिर छत की जांच कराएं कि वह पैनल panel का वजन उठा सकती है और दिन भर धूप मिलती है या नहीं। पेड़ या ऊंची इमारत की छाया उत्पादन घटा सकती है। इसके बाद कम से कम दो तीन विक्रेताओं से लिखित ब्योरा लें, जिसमें पैनल, इन्वर्टर, वारंटी और रखरखाव साफ लिखा हो।सरकारी योजनाओं yojnaon के बारे में भी सही जानकारी लें। खेती से जुड़ी सौर योजना Yojna में बड़े संयंत्रों के नियम अलग होते हैं, जैसे 500 किलोवाट से 2 मेगावाट megawatt तक की क्षमता और लंबी अवधि का समझौता, और उसमें पूंजीगत सब्सिडी नहीं होती। घर के छत वाले सिस्टम system के नियम इससे अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भी सब्सिडी subsidy या लाभ के दावे को सरकारी स्रोत से जांचे बिना सच न मानें।

सोलर पैनल solar panel लंबी अवधि का निवेश है। जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय खर्च, बचत और रखरखाव का पूरा हिसाब लगाएं। सही आकार का सिस्टम system और भरोसेमंद विक्रेता चुनने पर ही यह निवेश फायदेमंद होगा। लगाने से पहले अपने राज्य की बिजली कंपनी और सरकारी पोर्टल sarkari portal से नियमों की पुष्टि जरूर करें।

 

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