Birth-Death Registration New Rules 2026: जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम बदले, देरी पर अब लेनी होगी अलग-अलग स्तर की अनुमति 

Birth-Death Registration New Rules 2026: जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम बदले, देरी पर अब लेनी होगी अलग-अलग स्तर की अनुमति 

Birth-Death Registration New Rules 2026: जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराना अब पहले से भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। केंद्र सरकार ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के तहत देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में बदलाव किया है।

नए नियमों के अनुसार, जन्म या मृत्यु की सूचना देने में जितनी अधिक देरी होगी, उतने ही उच्च स्तर के अधिकारी या न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा।

यह संशोधन Registration of Births and Deaths Act, 1969 की Section 13 से संबंधित है। 2026 का संशोधन अधिनियम 6 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ और केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करके इसके प्रावधानों को 1 अक्टूबर 2026 से लागू किया है।

जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम 2026 क्या हैं?

नए प्रावधानों को आसान भाषा में समझें तो देरी के आधार पर पंजीकरण की प्रक्रिया तीन स्तरों में समझी जा सकती है।

क्रम जन्म/मृत्यु की सूचना में देरी पंजीकरण के लिए आवश्यक प्रक्रिया
1 30 दिन तक निर्धारित सामान्य प्रक्रिया और लागू विलंब शुल्क के अनुसार
2 30 दिन से अधिक, 1 वर्ष तक District Registrar/निर्धारित प्राधिकारी की लिखित अनुमति और निर्धारित शुल्क/दस्तावेज
3 1 वर्ष से अधिक, 2 वर्ष तक DM, SDM या DM द्वारा अधिकृत Executive Magistrate का आदेश
4 2 वर्ष से अधिक Judicial Magistrate First Class (JMFC) का आदेश

1. जन्म या मृत्यु की सूचना समय पर दें

जन्म या मृत्यु के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए। कानून में निर्धारित अवधि के भीतर सूचना देने पर प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल रहती है।

2023 के संशोधन के तहत 30 दिन के बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर दी गई सूचना के लिए District Registrar या निर्धारित अन्य प्राधिकारी की लिखित अनुमति का प्रावधान किया गया था।

2. 30 दिन से अधिक लेकिन एक वर्ष के भीतर देरी

यदि जन्म या मृत्यु की सूचना 30 दिन के बाद लेकिन एक वर्ष के भीतर दी जाती है, तो इसे delayed registration माना जाता है। ऐसे मामले में निर्धारित प्राधिकारी की लिखित अनुमति, लागू शुल्क और निर्धारित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

इसलिए यदि किसी परिवार में जन्म या मृत्यु का पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है और घटना को एक वर्ष पूरा नहीं हुआ है, तो संबंधित Registrar कार्यालय में प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेकर आवेदन करना उपयोगी होगा।

3. एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक देरी

2026 के संशोधन में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।

यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो अब पंजीकरण के लिए निम्न में से सक्षम अधिकारी का आदेश आवश्यक होगा:

  • District Magistrate (DM)
  • Sub-Divisional Magistrate (SDM)
  • District Magistrate द्वारा अधिकृत Executive Magistrate

इन अधिकारियों द्वारा जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन करने के बाद तथा निर्धारित शुल्क के भुगतान पर पंजीकरण का आदेश दिया जा सकता है।

4. दो वर्ष से अधिक पुराना मामला

यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक समय बाद दी जाती है, तो प्रक्रिया और अधिक औपचारिक हो जाती है।

ऐसे मामले में संबंधित क्षेत्र के Judicial Magistrate of the First Class (JMFC) का आदेश आवश्यक होगा। आदेश देने से पहले जन्म या मृत्यु की सही जानकारी का सत्यापन और निर्धारित शुल्क का भुगतान आवश्यक होगा।

2026 के नए नियमों को एक नजर में समझें

देरी की अवधि किस स्तर की अनुमति/प्रक्रिया? मुख्य बात
30 दिन तक सामान्य प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पंजीकरण
30 दिन से अधिक–1 वर्ष तक District Registrar/निर्धारित प्राधिकारी लिखित अनुमति, शुल्क और दस्तावेज
1 वर्ष से अधिक–2 वर्ष तक DM/SDM/अधिकृत Executive Magistrate सत्यापन के बाद आदेश
2 वर्ष से अधिक JMFC न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश और सत्यापन

2026 में Section 13 में क्या बदला?

Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 ने मुख्य रूप से Section 13 के delayed registration से जुड़े प्रावधानों को बदला है।

संशोधन अधिनियम में एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी के लिए DM, SDM या अधिकृत Executive Magistrate के आदेश की व्यवस्था की गई है। वहीं दो वर्ष से अधिक की देरी के मामलों में Judicial Magistrate First Class के आदेश का प्रावधान किया गया है।

1 अक्टूबर 2026 से लागू हुए नए प्रावधान

संशोधन अधिनियम में यह व्यवस्था थी कि इसके लागू होने की तारीख केंद्र सरकार Official Gazette में अधिसूचना के माध्यम से तय करेगी।

केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत Registrar General of India के कार्यालय ने 16 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर 1 अक्टूबर 2026 को इसकी प्रभावी तारीख निर्धारित की।

इसका मतलब है कि 1 अक्टूबर 2026 से Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के संबंधित प्रावधान लागू हैं।

जन्म प्रमाण पत्र क्यों जरूरी है?

जन्म प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की जन्मतिथि और जन्मस्थान से जुड़ा महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है। इसलिए जन्म का पंजीकरण समय पर कराना भविष्य में विभिन्न सरकारी और प्रशासनिक कार्यों में उपयोगी हो सकता है।

सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार CRS व्यवस्था में ऑनलाइन शुल्क भुगतान, delayed reporting, SMS/e-mail notification, e-sign, इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणपत्र और DigiLocker जैसी सुविधाओं को शामिल किया गया है।

नागरिकों के लिए जरूरी सलाह

जन्म या मृत्यु की घटना होने के बाद पंजीकरण को टालना नहीं चाहिए। देरी बढ़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज, सत्यापन और उच्च स्तर के अधिकारी का आदेश आवश्यक हो सकता है।

खास तौर पर दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में सीधे सामान्य Registrar प्रक्रिया मानकर आवेदन करने के बजाय संबंधित स्थानीय पंजीकरण कार्यालय से वर्तमान प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेना उचित रहेगा।

निष्कर्ष

Birth-Death Registration New Rules 2026 के तहत देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने की प्रक्रिया को अलग-अलग समय-सीमा के आधार पर व्यवस्थित किया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि:

1 वर्ष से अधिक लेकिन 2 वर्ष तक की देरी → DM/SDM/अधिकृत Executive Magistrate का आदेश

और

2 वर्ष से अधिक की देरी → Judicial Magistrate First Class (JMFC) का आदेश

आवश्यक होगा। ये नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू हैं।

नोट: पंजीकरण की स्थानीय प्रक्रिया, शुल्क और आवश्यक दस्तावेज राज्य/स्थानीय निकाय के नियमों के अनुसार अलग हो सकते हैं। आवेदन करने से पहले संबंधित Registrar कार्यालय से आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि जरूर करें।

 

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