निम्न कारणों से सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में उपस्थिति कम रहती है ………
👉अप्रैल में नामांकन करने पर जुलाई में प्रत्येक अभिभावक के खाते में ₹1200 आ जाते हैं जिसमें यूनिफॉर्म, जूता, मोजा, स्वेटर, बैग, स्टेशनरी आदि का पैसा होता है अभिभावक वही पैसा निकालकर बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने लगता है और वह बच्चा प्राइमरी में अनुपस्थित रहता है।
👉रोज कोई न कोई सूचना, कोई न कोई आदेश आता है और वह सूचना बनाकर विभाग को हार्ड/सॉफ्ट कॉपी में देनी होती है और तमाम ऐसे भी काम है जिसमें लगातार फीडिंग का काम शिक्षकों से लिया जा रहा है ऐसी स्थिति में शिक्षक क्लास नहीं ले पाता, अधिकतर तो ऐसे स्कूल हैं जहां कक्षा 1 से 8 तक की कक्षाएं हैं और वहां पर 2 अथवा 3 अथवा 4 अध्यापक है ऐसे में सभी कक्षाओं को कौन पढ़ाएगा? जिस कारण अभिभावक सरकारी स्कूल से प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को भेज रहे हैं।
👉कोई बच्चा जब विद्यालय में प्रवेश के लिए आता है उस समय विभाग ने यह कह रखा है कि बिना आधार वाले छात्रों को भी आप प्रवेश दें, यदि बच्चे के पास आधार नहीं है तो उसे प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता, इस वजह से प्रधानाध्यापक जान ही नहीं पता कि वह बच्चा कितने स्कूलों में पहले से पंजीकृत है।
👉विभाग का नियम है प्रवेश लेने के लिए पूर्व की कक्षा की T.C. होना आवश्यक नहीं है शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत उम्र के आधार पर कक्षा एक से लगाकर आठ तक छात्र को शपथ पत्र लेकर प्रवेश देना पड़ेगा। जबकि वह छात्र पिछले सत्र में किसी दूसरे विद्यालय में प्रवेश लेकर 1200 रुपए का लाभ ले चुका होता है।
👉कोरोना कॉल में जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे थे और स्कूल बंद होने के बाद विद्यालय द्वारा पूरी फीस ली गई थी और क्लासेस नहीं चली इस कारण अभिभावकों ने बच्चों को घर पर ही ट्यूशन दिलवाई और स्कूल की फीस नहीं जमां की इस कारण स्कूलों ने स्थानांतरण प्रमाण पत्र नहीं दिया, इस कारण भी अधिकतर अभिभावको ने नजदीकी सरकारी स्कूलों में नामांकन कराने लगे हैं जिससे कि उनको जब चाहे वह स्थानांतरण प्रमाण पत्र टीसी मिल जाए, जबकि उनके बच्चे प्राथमिक विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं प्राइवेट स्कूल में जाते हैं अब उन्होंने नामांकन कर लिया अब प्रधान अध्यापक पूरे वर्ष उनका नाम नहीं काट सकता तो उपस्थित घटेगी नहीं तो और क्या होगा।
👉निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 अपनी अनुसूची में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों तरह के स्कूलों के लिये छात्र : शिक्षक अनुपात (PTR) को निर्धारित करता है। इसके अनुसार, प्राथमिक स्तर PS में 30:1 और उच्च प्राथमिक स्तर UPS में 35:1 होना चाहिये। लेकिन दूर के स्कूलों में 400/500 छात्रों पर दो-तीन शिक्षक हैं, ऐसे में कितनी पढ़ाई हो पायेगी, आप सब समझ सकते हैं।
👉एमडीएम की व्यवस्था प्रधानाध्यापक द्वारा की जाती है जब किसी घर में एक बारात आती है तो पहले से कितनी व्यवस्था करनी पड़ती है और विद्यालय में तो इस तरीके से रोज एक बारात भर का खाना बनता और खिलाया जाता है अब आप सोच लीजिए कि उस व्यवस्था के लिए एक प्रधानाध्यापक कितना परेशान होता है सोमवार के दिन वह पहले स्कूल जाए बच्चों की संख्या की गिनती करें, फिर उसके बाद किसी पड़ोस के कस्बे में जाकर वहां से फल खरीदे और वह फल वितरण स्कूल में करें, और फल खरीदने के समय में यदि इस दौरान कोई अधिकारी विद्यालय आ जाय और उस प्रधानाध्यापक को अनुपस्थित करके चला जाता है फिर उसके लाख कहने पर भी उसकी अधिकारी नहीं सुनता कि वह फल लेने गया था।
👉अप्रैल में प्रवेश के समय शिक्षकों पर दबाव रहता है कि पिछले वर्ष से 10% अधिक इस वर्ष नामांकन बढ़ाए जाने पर, शिक्षक क्या करें जब गांव में बच्चे ही नहीं हैं ।
👉अधिकतर गांवों में जिनके बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे होते हैं वह भी अप्रैल में विद्यालय जाकर सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों का नाम लिखवा देते हैं और उसके बाद सरकारी स्कूल में उनके बच्चे कभी उपस्थित नहीं होते।
नियमानुसार बच्चा विद्यालय में लगातार अनुपस्थित होता है फिर भी प्रधानाध्यापक बच्चों को न तो नोटिस दे सकता है और न ही नाम काट सकता (क्योंकि नाम काटने पर उसका वेतन रोक दिया जाएगा) जबकि वही छात्र लगातार प्राइवेट स्कूल में उपस्थित होकर पढ़ रहा होता है।
👉स्कूल का छात्र यदि विद्यालय में अनुपस्थित है तो उसकी समस्त जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक अथवा स्टाफ की नहीं है उसके लिए उनके माता-पिता भी जिम्मेदार हैं अपने साथ बच्चों को काम कराने साथ में ले जाते हैं अथवा उनको काम के लिए भेज देते हैं।