सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई
सरकारी प्राइमरी स्कूलों School में नौकरी कर रहे शिक्षकों Teacher’s के लिए एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट highcourt ने यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को राज्यभर के बेसिक स्कूलों School में तैनात सभी शिक्षकों के शैक्षिक दस्तावेजों document की गहन जांच करने का कड़ा निर्देश दे दिया है।अदालत का यह सख्त आदेश उन गंभीर मामलों को सामने आने के बाद आया है, जिनमें कथित तौर पर जाली दस्तावेजों या फिर दूसरे लोगों के प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करके नौकरियां हासिल की गई हैं। जांच में कुछ ऐसे चौंकाने वाले मामले भी सामने आए हैं, जहां केवल एक ही सेट के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर 10 या उससे अधिक लोगों को नौकरी मिल गई है।
1 से 8 तक के टीचर्स पर पड़ेगा सीधा असर
हाईकोर्ट highcourt के इस नए आदेश का सीधा असर कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों Teacher’s पर पड़ने वाला है। अदालत ने सभी शिक्षकों Teacher’s को यह कड़ा निर्देश दिया है कि वे महज एक सप्ताह के भीतर अपने नियुक्ति पत्र और सभी शैक्षिक दस्तावेजों की साफ-सुथरी प्रतियां अपने संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के पास जमा करवाएं। इसके बाद बीएसए BSA इन सभी दस्तावेजों को आगे की जांच के लिए संबंधित एसटीएफ STF रेंज कार्यालयों को भेजेंगे।
शिक्षकों को जमा करने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
इलाहाबाद हाईकोर्ट HC के आदेश के मुताबिक, सभी शिक्षकों Teacher’s को अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षिक प्रमाणपत्रों की फोटोकॉपी photocopy के साथ-साथ एक नोटरी द्वारा सत्यापित शपथपत्र भी देना होगा। इस शपथपत्र में उन्हें अपने उन सभी निकट संबंधियों का पूरा ब्योरा देना होगा, जो उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में बीएसए (BSA) या उससे ऊपर के किसी पद पर कार्यरत रहे हैं या फिर वहां से सेवानिवृत्त हुए हैं।कोर्ट court ने एसटीएफ STF को इन सभी दस्तावेजों document के सत्यापन के लिए एक पुख्ता व्यवस्था तैयार करने को कहा है। इसके लिए जरूरत पड़ने पर संबंधित जिलों District के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) या पुलिस कमिश्नर की मदद भी ली जा सकती है।
शिक्षा विभाग और STF के बड़े अधिकारी रखेंगे नजर
इस पूरी जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए, इसके लिए हाईकोर्ट HC ने शिक्षा विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है। राज्य के शिक्षा निदेशक बीएसए BSA द्वारा किए जाने वाले कामों की निगरानी करेंगे और रोजमर्रा की मॉनिटरिंग के लिए किसी विशेष अधिकारी को भी नियुक्त कर सकते हैं।
इसी प्रकार, एसटीएफ STF के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक इस पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। अपने 16 अक्टूबर October के आदेश में कोर्ट court ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, यदि वे अपने कर्तव्य में कोई भी लापरवाही या चूक करते हैं, तो इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और संबंधित अधिकारी को इसके लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।