9 साल से UP में शिक्षक भर्ती का इंतजार, ऐलान के बावजूद नहीं निकली नई भर्ती; सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। करीब 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों पर नई भर्ती की मांग को लेकर डीएलएड अभ्यर्थियों का प्रयागराज में आंदोलन 11वें दिन भी जारी रहा। बारिश और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर डटे रहे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली हैं, लेकिन इसके बावजूद नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया जा रहा है। छात्रों ने सरकार से जल्द से जल्द खाली पदों का अधियाचन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
छात्रों की सबसे बड़ी मांग क्या है?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांग करीब 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों पर नई भर्ती का विज्ञापन जारी करने की है।
छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। अब सरकार को इस मामले में स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन के दौरान कई अभ्यर्थी हाथों में संविधान की किताब लेकर अपनी मांग को लेकर नारेबाजी करते नजर आए। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं धरना स्थल पर मौजूद रहे।
आयोग से प्रतिनिधिमंडल की क्या बात हुई?
आंदोलन से जुड़े राहुल यादव और अभिषेक तिवारी के मुताबिक, प्रशासन के ADM सिटी सत्यम मिश्रा के समन्वय में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की शिक्षा सेवा चयन आयोग के उपसचिव संजय सिंह से मुलाकात हुई। प्रतिनिधिमंडल को आयोग की ओर से बताया गया कि नगर संवर्ग के 11,508 शिक्षक पदों का अधियाचन प्राप्त हो चुका है। साथ ही शिक्षक भर्ती से संबंधित नियमावली में संशोधन करते हुए एकेडमिक मेरिट को हटा दिया गया है।
वहीं, ग्रामीण संवर्ग के रिक्त पदों का अधियाचन फिलहाल 69,000 शिक्षक भर्ती प्रकरण के सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने के कारण तकनीकी समस्या में अटका हुआ है। आयोग की कोशिश है कि ग्रामीण संवर्ग के पदों का अधियाचन भी जल्द प्राप्त हो, ताकि नगर और ग्रामीण संवर्ग के पदों को शामिल करते हुए संयुक्त भर्ती का विज्ञापन जारी किया जा सके।
राहुल यादव और अभिषेक तिवारी ने उम्मीद जताई कि शिक्षक भर्ती को लेकर जल्द ही कोई सकारात्मक और बड़ा अपडेट सामने आ सकता है।
नियमावली में बदलाव से भी नाराज अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों की नाराजगी सिर्फ नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं होने तक सीमित नहीं है। उन्होंने शिक्षक भर्ती की नियमावली में किए गए बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुरानी नियमावली में प्रवक्ता पद के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था, जबकि नई नियमावली में बीएड को जरूरी किए जाने से कई अभ्यर्थियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने पहले से लागू पात्रता और नियमों के आधार पर अपनी तैयारी की थी। ऐसे में नियमों में बदलाव से उनके सामने नई चुनौती पैदा हो गई है। इसलिए वे पुरानी नियमावली को बहाल करने की मांग भी कर रहे हैं।
बारिश के बीच भी जारी रहा प्रदर्शन
गुरुवार को बारिश के बावजूद अभ्यर्थी धरना स्थल से नहीं हटे। बड़ी संख्या में छात्राएं भी आंदोलन में शामिल रहीं। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग के पास खड़े होकर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते नजर आए।
छात्र समिति के संयोजक आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधि अभिषेक तिवारी ने कहा कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने तक अभ्यर्थियों का संघर्ष जारी रहेगा। फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर सरकार और आयोग के अगले कदम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 60 हजार प्राथमिक शिक्षक पदों की प्रस्तावित भर्ती को लेकर विज्ञापन कब जारी होता है और भर्ती प्रक्रिया कब शुरू होती है।