सरकारी स्कूलों में MDM पर संकट, 5 महीने से नहीं मिला बजट, 14 करोड़ का भुगतान फंसा, प्रधानाध्यापक उधारी पर चला रहे भोजन
उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh के आजमगढ़ जिले के परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) का बजट अटकने से आर्थिक संकट गहरा गया है. मई से सितंबर तक करीब 5 महीने की धनराशि नहीं मिलने के कारण लगभग 14 करोड़ crore रुपये का भुगतान लंबित है।
बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रधानाध्यापकों headmaster को अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है. वहीं, दुकानदारों का बकाया बढ़ने से उधार पर राशन मिलना भी मुश्किल हो गया है।
बच्चों का भोजन बंद नहीं करने का निर्देश
विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी स्थिति में विद्यालयों vidyalaya में बच्चों का मध्याह्न भोजन बंद नहीं होना चाहिए. इसी निर्देश के चलते प्रधानाध्यापक Headmaster आर्थिक परेशानियों के बावजूद रोजाना भोजन की व्यवस्था करने में जुटे हैं. हालांकि, लगातार बजट budget नहीं मिलने से विद्यालयों के सामने भोजन बनवाने और राशन की व्यवस्था करने की चुनौती बढ़ती जा रही है।
दुकानदारों ने उधार में राशन देने से किया मना
विद्यालयों vidyalaya में एमडीएम MDM के लिए राशन और अन्य जरूरी सामग्री की खरीदारी स्थानीय दुकानदारों से की जाती है. लेकिन पांच महीने mhine से भुगतान लंबित रहने के कारण दुकानदारों का बकाया बढ़ गया है. अब कई दुकानदारों ने उधार में राशन देने से मना करना शुरू कर दिया है. ऐसे में प्रधानाध्यापकों headmaster के लिए बच्चों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल होता जा रहा है. यदि समय पर धनराशि नहीं मिली, तो इसका असर भोजन व्यवस्था पर पड़ सकता है।
ट्रेजरी में भेजी गई 14 करोड़ रुपये की राशि
इस मामले में बीएसए BSA आजमगढ़ राजीव कुमार पाठक ने बताया कि मई से सितंबर तक की मध्याह्न भोजन योजना की करीब 14 करोड़ रुपये rupye की धनराशि ट्रेजरी में भेज दी गई है. जल्द ही यह राशि विद्यालयों vidyalaya के खातों में पहुंच जाएगी. वहीं, एमडीएम MDM प्रभारी अंजनी सिन्हा ने भी पुष्टि की कि संबंधित अवधि की धनराशि ट्रेजरी में भेजी जा चुकी है और जल्द ही विद्यालयों vidyalaya के खातों Account में भुगतान होने की उम्मीद है।