परिषदीय विद्यालयों के दो हजार से अधिक शिक्षक सप्ताह में दो दिन नहीं जा रहे स्कूल

परिषदीय विद्यालयों के दो हजार से अधिक शिक्षक सप्ताह में दो दिन नहीं जा रहे स्कूल

BLO Duty Name Absent बीएलओ ड्यूटी के नाम पर शिक्षक नदारद  

More Than Two Thousand परिषदीय विद्यालयों के दो हजार से अधिक शिक्षक सप्ताह में दो दिन नहीं जा रहे स्कूल  

Reporter Ravishankar Gupta Report रविशंकर गुप्ता  

Lucknow Two Thousand Teachers लखनऊ। राजधानी के सरकारी विद्यालयों vidyalaya में करीब दो हजार शिक्षक Teacher बीएलओ ड्यूटी duty के नाम पर सप्ताह में दो दिन स्कूल नहीं जा रहे हैं।  

Teachers Cite BLO Duty ये शिक्षक प्रधानाध्यापकों व खंड शिक्षा अधिकारियों को बीएलओ ड्यूटी का हवाला देते हैं।  

Shocking No Such हैरानी की बात यह है कि बीएलओ कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक Teacher दो दिन स्कूल पढ़ाने न जाएं ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है।  

Headmasters Say Children Affected इस संबंध में प्रधानाध्यापक कहते हैं कि शिक्षकों Teacher’s के स्कूल न आने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।  

Teacher Shortage Already Worsened नवंबर November में बच्चों का निपुण आकलन होना है। शिक्षकों Teacher’s की पहले से कमी है। बचे हुए शिक्षक teacher यदि बीएलओ ड्यूटी के नाम पर स्कूल नहीं  

No Such Order Issued मेरे द्वारा कोई ऐसा आदेश नहीं किया गया है कि सप्ताह में दो दिन शिक्षक Teacher स्कूल से कार्य मुक्त रहें। पूर्व में कोई आदेश हुआ हो तो मेरी जानकारी नहीं है। वर्तमान में बीएलओ से जुड़े काम भी नहीं हो रहे हैं। – प्रदीप कुमार, एडीएम प्रशासन  

Reports Sought From Blocks इस संबंध में सभी ब्लाकों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। कोई भी शिक्षक Teacher बच्चों की पढ़ाई नहीं प्रभावित कर सकता है। जांच कर इसकी कार्रवाई की जाएगी। – श्याम किशोर तिवारी, एडी बेसिक  

Teaching Affected How Will आएंगे तो पढ़ाई कैसे होगी। खंड शिक्षा अधिकारी भी परेशान हैं क्योंकि इस मामले में बीएसए BSA के आदेशों को भी दरकिनार किया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि आखिर किसके इशारे पर ऐसा हो रहा है। 

Duty Last Option Only शिक्षकों Teacher’s की ड्यूटी अंतिम विकल्प : इलाहाबाद हाईकोर्ट HC के जारी निर्देशों और ईसीआई की गाइडलाइंस के अनुसार  

BLO Duty Only Last बीएलओ ड्यूटी के लिए शिक्षकों की तैनाती हमेशा अंतिम विकल्प होनी चाहिए। पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, लेखपाल, पटवारी, पंचायत सचिव, डाकिया, ग्राम विकास अधिकारी, बिजली बिल रीडर, क्लर्क को बीएलओ बनाना चाहिए। आरटीई एक्ट 2009 की धारा 27 के मुताबिक शिक्षण अवधि के दौरान बीएलओ कार्य से स्कूल का समय या पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी  

Should Be Non-Teaching चाहिए। नियमानुसार बीएलओ से जुड़ा कार्य गैर-शिक्षण घंटों या छुट्टियों के दौरान ही कराया जाना चाहिए।  

All Teachers Relieved Earlier पूर्व डीएम ने मुक्त कर दिया था सभी शिक्षकों को : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री वीरेंद्र सिंह ने कहा कि लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों को लगाने से छात्रों का विद्यालय से मोहभंग होता है। इससे नामांकन संख्या घट जाती है। पूर्व जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने सभी शिक्षकों को बीएलओ कार्य से मुक्त कर दिया था।  

One Work At Time दूसरी ओर खंड शिक्षा अधिकारियों का सुझाव है कि शिक्षकों को शिक्षण कार्य के बाद ही बीएलओ ड्यूटी पर लगाया जाना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट आदेश जारी होने से ही सुधार संभव है। शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ बीएलओ ड्यूटी का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि स्कूल जाकर बीएलओ ड्यूटी करना आसान नहीं। ऐसे में एक समय में एक ही काम कराया जाए।

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