फर्जी दस्तावेज पर 11 साल नौकरी करने वाला शिक्षक बर्खास्त, पढ़िए डिटेल्स
चंदौली में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र document के आधार पर करीब 11 वर्ष तक सहायक अध्यापक teacher के पद पर नौकरी करने का मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग basic shiksha vibhag की सत्यापन व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। विभागीय जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बाद शिक्षक teacher की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। अब अगस्त 2014 से दिसंबर December 2025 तक वेतन के रूप में भुगतान किए गए 68.81 लाख lakh रुपये rupye की रिकवरी की कार्रवाई की तैयारी है।
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वाराणसी के लालपुर-पांडेयपुर थाना क्षेत्र के हाशिमपुर निवासी रमेश प्रसाद की नियुक्ति 14 अगस्त August 2014 को चंदौली सदर शिक्षा क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय vidalaya कांटा में सहायक अध्यापक AT के पद पर हुई थी। पड़ोसी रामसजीवन की शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी BSA सचिन कुमार ने 29 जनवरी 2026 को शिक्षक को नोटिस जारी कर शैक्षिक प्रमाणपत्र, नियुक्ति पत्र, पैन कार्ड और आधार कार्ड aadhar card के साथ कार्यालय में उपस्थित होने को कहा था। विभाग vibhag के अनुसार शिक्षक teacher न तो कार्यालय में उपस्थित हुआ और न ही नोटिस notice का जवाब दिया।
इसके बाद नौ फरवरी को नियुक्ति निरस्त करने का आदेश जारी किया गया। साथ ही खंड शिक्षा अधिकारी BEO सदर डा. राजेश चतुर्वेदी को एफआईआर FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। विभाग का दावा है कि सत्यापन के दौरान शिक्षक के शैक्षिक प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।
बीएसए BSA के निर्देश के आठ महीने बाद एफआईआर FIR दर्ज होने से अब कार्रवाई में देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 9 फरवरी febuary को आदेश जारी होने के बावजूद खंड शिक्षा अधिकारी BEO द्वारा अब जाकर चंदौली सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस Police ने धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।जांच का दायरा अब केवल शिक्षक की भूमिका तक सीमित नहीं रह सकता। नियुक्ति, प्रमाणपत्र सत्यापन और इतने वर्षों तक वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है। आरोप है कि तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और वित्त लेखाधिकारी की मिलीभगत से शिक्षक दिसंबर 2025 तक वेतन प्राप्त करता रहा। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
अगस्त August 2014 से दिसंबर 2025 तक करीब 68.81 लाख lakh रुपये rupye के सरकारी धन का भुगतान इस मामले का अहम पहलू है। अब सरकारी धन की रिकवरी recovery के साथ जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।