बड़ी खबर; अंशकालिक अनुदेशकों को सेवा से हटाने का आदेश रद्द
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट HC ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उन अंशकालिक अनुदेशकों anudeshako की सेवाओं को समाप्त करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया है, जिन्हें छात्र संख्या 100 से कम होने के आधार पर निकाला गया था। याचिकाकर्ताओं की मनसा चौहान ने न केवल कुमार और अन्य द्वारा लाए गए याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि स्कूलों school में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए केवल
Anshkalik Anudeshakon Ko Zimmedar अंशकालिक अनुदेशकों anudeshako को जिम्मेदार ठहराना न केवल मनमाना है, बल्कि अनुच्छेद 14 का खुला उल्लंघन करता है, न कि संविधान मामलों का परीक्षण करना, और इस प्रकार याचिकाकर्ताओं को काम के लिए एक पूरे सरकार Government से बाहर कर दिया जा सकता है, जो उनके नियंत्रण से बाहर है। मामले के अनुसार, इन अनुदेशकों anudeshako की नियुक्ति शिक्षा Shiksha का अधिकार अधिनियम, 2009 के लक्ष्यों को पूरा Karne Ke Liye Kala करने के लिए कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा जैसे विषयों के लिए वर्ष 2013 के शासनादेश के तहत की गई थी। हालांकि, कई वर्षों तक सेवा देने के बाद अधिकारियों ने इस आधार पर उनका नवीनीकरण रोक दिया कि उनके संबंधित स्कूलों में छात्रों की
Sankhya 100 Ke Manak संख्या 100 के मानक से नीचे चली गई है। याचिकाओं में उल्लेख है कि मई 2013 के मूल शासनादेश के क्लॉज-6 में नवीनीकरण के लिए ऐसी किसी शर्त का उल्लेख नहीं है कि छात्र संख्या घटने पर स्वतः सेवा समाप्त कर दी जाती है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का संदर्भ दिया, जिनमें कहा गया है कि अंशकालिक अनुदेशकों anudeshako की नियुक्ति शिक्षा के समान ही माना जाना चाहिए। इसके समान योग्यता रखने और उन पर अन्य कोचिंग नौकरी करने पर प्रतिबंध भी होता है, जो उन्हें वास्तव में पूर्णकालिक शिक्षक Teacher के समकक्ष बनाता है। कोर्ट court ने यह भी कहा कि सरकार Government संस्थाओं में सुधार किया जाना चाहिए ताकि ये निचले स्कूलों school में प्रवेश कर सकें। छात्र संख्या घटने पर, बजाय इसके इसका दोष केवल अनुदेशकों anudeshako पर मढ़ा जाए। अदालत ने आदेश में पूर्व में विचारित आदेशों को निरसित करते हुए निर्देश दिया कि मामले पर नए सिरे से विचार करें। अधिकारियों को आदेश दिया कि वे छह सप्ताह week में एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित करें।